Tuesday, May 16, 2006

चच्चू, चच्चू आखिर ये चच्चू है कौन ???

यही सवाल परेशान कर रहा है ना कि ये चच्चू है कौन।

वैसे तो चच्चू का परिचय देना अपने आप में एक खतरनाक काम है। मान लीजिये कि आपने कहा कि चच्चू को हिन्दी, अंग्रेज़ी व उर्दू अच्छे से आती है तो चच्चू कहेंगे कि पंजाबी, पश्तूनी और पुर्त्गाली को क्यों छोड़ दिया। कहीं आप कह बैठे कि चच्चू को हाकी, फ़ुटबाल और टेनिस खेलना आता है तो चच्चू कहेंगे कि बेस्बाल, रग्बी और फ़ार्मूला वन को क्यों छोड़ दिया - मतलब चच्चू को सब आता है।

अच्छा जी, ज़रा बोल कर दिखाइए यही बात चच्चू के सामने, एक बार गांव के सरपंच ने नये बी डी ओ साहब के सामने चच्चू की तारीफ़ करते हुए ऐसा बोल दिया था तो कितना भड़क गये थे चच्चू। कड़क कर बोले थे, "मुखिया जी, चच्चू को सब नहीं आता है, चच्चू को सबसे ज़्यादा आता है"

और आए भी क्यों नहीं। विलायत से पढ़ कर आए है, घर पर टी वी, फ़ोन, इनटर्नेट, अखबार सब आता है, देश दुनिया की सारी खबर रह्ती है चच्चू को। गांव में सभी बूढ़े, जवान उनकी इज़्ज़त करते हैं, यहां तक कि मुखिया जी भी चच्चू से बिना राय लिये कुछ नहीं करते।

तो ऐसे हैं हमारे चच्चू। और मैं हूं आपका खबरी, चच्चू की चौपाल से सारी चटपटी, मसालेदार खबरें आप तक पहुंचाने का काम करूंगा।